Posts

Image
               पुस्तक समीक्षा: सॉफ्ट कॉर्नर                                       ✍  डॉ. सीमा शर्मा 'सॉफ्ट कॉर्नर ' राम नगीना मौर्य का तीसरा कहानी संग्रह है , जिसमें उन्होंने दैनिक जीवन की साधारण घटनाओं को कहानियों की कथावस्तु बनाया है और उन सूक्ष्म अनुभवों को बड़ी प्रमाणिकता के साथ अंकित किया है ,जिन पर सामान्य जन ध्यान भी नहीं देते। लेकिन कथा पाठ करते समय पाठक लेखक की अनुभूतियों के साथ जुड़ता चला जाता है।लेखक ने कहीं संवाद शैली तो कहीं वर्णात्मक शैली को अपनाया है।कहानियों के सभी पात्र भी सामान्य पृष्ठभूमि से लिए गए हैं। उनके चरित्र इतने सजीव हैं कि उन्हें हम अपने आसपास के समाज में आसानी से देख सकते है ।इनमें कोई नायक या अनायक नहीं सब मेरे और आपके जैसे सामान्य मानव हैं। लेखक की अपनी दुनिया है लेकिन उससे जुड़े उसके परिजनों की अपनी व्यवस्था तथा दोनों ही ओर से एक दूसरे की सीमाओं में अतिक्रमण ,जाने अनजाने होता ही है। यहीं से जन्म लेती है संग्रह क...

बजरंगबली कहाँर की दो कविताएँ

Image
बजरंगबली कहाँर की दो रेखांकन:सम्पादक  कविताएँ 1. बुझती हुई मशाल  आप ऐसे मिलें जैसे- किसी क्राँतिकारी को  मिल जाय घनघोर अँधेरे में, जलती हुई मशाल । मशाल मिलते ही  तीव्र हो जाती है, उसके कदमों की चाल। वह सारे कठिनाइयों ,बाधाओं को  कर रहा था पार, उसके कदमो की चाल कितनी मधुर थी, कि आ गई मझधार , चल गई आँधी  जैसे अर्धवस्त्र हो गया हो गाँधी भगतसिंह को लटका दिया गया फाँसी के तख़्त पर  ऐसे ही कष्ट बीतने लगे उसके हृदय सख्त पर  कुछ मन्द पड़ गई उसकी चाल, बुझ रही थी मशाल ,बुझ रही थी मशाल । पर क्रान्तिकारी रुक कैसे सकता था, वह बढ़ रहा है आगे कैसे अपने उद्देश्य से पीछे भागे ? लग गई ठोकर फिर वही अंधकार विकराल  बुझ गई थी मशाल,बुझ गई थी मशाल । 2.सहृदयधारिणी सहृदयधारिणी, यही सम्बोधन है मेरे पास आपके लिए क्योंकि आप इसी रूप में मेरे जीवन में प्रवेश कियें थें । आपने मुझे मित्र रूप में स्वीकार किया था , परंतु मैं सदा मित्रता की परिधि से बाहर ही रहा जिसका ज्...

पुस्तक समीक्षा: फेसबुक लाइव और जिन्दगी का दी एंड

Image
               पुस्तक समीक्षा  समाज का केंद्र बिंदु है: फेसबुक लाइव और जिन्दगी का दी एंड    चित्रकार व लघुकथाकार श्री मार्टिन जाॅन जी की प्रकाशित लघुकथा संग्रह "फेसबुक लाइव और जिन्दगी का दी एंड" एक बहु आयामी व अतुल्य लघुकथा संग्रह हैं। मार्टिन जाॅन जी ने अपनी लघुकथा में समाजिक, व्यवहारिक, आत्मविश्वास व व्यक्ति विशेष पर घटित व्यथाओ पर लघुकथा के माध्यम से ध्यान आकृष्ट करनें का प्रयास किया है। इस संकलन में कुल ७५ लघुकथाएँ हैं, जो विभिन्न दृष्टिकोण व मार्मिकता पर केन्द्रित है।                कई लघुकथा जैसे-फासला बरकरार है, जुनून-ए-लाइक,मार्केट पॉलिसी, रोटीचोरवा,रेप वन्स अगेन आदि अनेक लघुकथाओं में  सामाजिक नजरिये को पुस्तक: फेसबुक लाइव और जिन्दगी का दी एंड लेखक: मार्टिन जाॅन  दर्शाया गया हैं, जिससे कहीं न कहीं हम सब अवगत हैं। इस संकलन में कुछ और लघुकथाएं हैं जो अनुभव, शिकायत, प्यार, नफ़रत और ऐसे अनगिनत जीवन के पहलूओ को प्रकाशित कर रहा हैं। कथाकार ने स्त्री व पुरूष वर्ग...
Image
            अवधेश कुमार अवधेश की दो क्षणिकाएं                   1. रफ्तार                   क्या कहूँ,                   उसकी गाड़ी की रफ्तार                   कुछ ज्यादा ही तेज थी                   जाने कैसे अचानक                   एक कुत्ते से टकराई फिर-                  आगे झुक गयी,                  और स्टेयरिंग से                    ऐसी चोट खाई कि,                   खुद उसकी ही.                   जिंदगी की रफ्तार ,     ...

रोहित ठाकुर की कविताएँ

Image
                    रोहित ठाकुर की कविताएँ    1. शहर से गुज़रते हुए  शहर के अंदर बसता है आदमी आदमी के अंदर बसता है शहर आदमी घेरता है एक जगह शहर के अंदर शहर भी घेरता है एक जगह आदमी के अंदर जब शहर भींगता है भींगता है आदमी एक शहर से दूसरे - तीसरे शहर जाता आदमी कई शहर को एक साथ जोड़ देता है अपने दिमाग की नसों में जब एक शहर उखड़ता है तो उखड़ जाता है आदमी एक छोटा सा आदमी बिलकुल मेरे जैसा अपनी स्मृतियों में रोज - रोज उस शहर को लौटता है जहाँ उसने किसी को अपना कहा उसका कोई अपना जहाँ रहता है उस शहर में जहाँ लिखी प्रेम कविताऐं जहाँ  किसी को उसकी आँखों की रंग से पहचानता हूं उस शहर में जहाँ मैं किसी को उसकी आवाज़ से जानता हूँ उस जैसे कई शहर का रास्ता मुझसे हो कर जाता है हर शहर एक खूबसूरत शहर है जिसकी स्मृतियों का मैंने व्यापार नहीं किया मैं जानता हूँ समय का कुछ हिस्सा मेरे शहर में रह जायेगा  इस तरफ नदी के जब मेरी रेलगाड़ी लाँघती रहेगी गंगा को और हम लाँघते रहेंगे समय की चौखट को अपनी ज...

पुस्तक समीक्षा: तुम्हारा होना सच नहीं है/कृष्ण सुकुमार

Image
                                                                पुस्तक समीक्षा                               प्रेम की परिभाषा को परिभाषित करती पुस्तक: तुम्हारा होना सच नहीं है! कवि कृष्ण सुकुमार जी के काव्य संग्रह  ' तुम्हारा होना सच नहीं है! ' बोधि प्रकाशन पुस्तक: तुम्हारा होना सच नहीं है   द्वारा प्रकाशित एक पाठनीय पुस्तक है। इस पुस्तक में कवि ने प्रेम के होने या ना होने की वास्तविकता को बहुत ही सुंदरतापूर्वक प्रस्तुत किया है, कवि के इस काव्य संग्रह में अदृश्य प्रेम की कल्पनात्मक सृजन द्वारा सामाजिक शब्दावली के साथ-साथ सामाजिक रूपरेखा को बदलने की प्रमुख दृष्टि है।आजकल प्रेम जो हर गली,कस्बों में देखने को मिलता है यह वह प्रेम नहीं है जो क्षणिक हो, यह तो अनुभव के प्रेम को जागृत करती हैं। सुकुमार जी की कविता में प्यार के सा...

एक बेनाम नाटक: सुदामा सिंह

Image
                                                                                             नाटक                                                                    एक बेनाम नाटक पात्र:     1.निर्देशक                                      2 नेताजी रेखांकन:सम्पादक      3 दर्शक नंबर एक     4 दर्शक नंबर दो                                        ...